जनतंत्र का जन्म  रामधारी सिंह दिनकर 
10th Exam

बिहार बोर्ड क्लास 10th हिंदी कॉल लोंग फॉर शॉर्ट आंसर जनतंत्र का जन्म – रामधारी सिंह

जनतंत्र का जन्म  रामधारी सिंह दिनकर  

1.  सर्दियों में ठंडी बुझी रॉक सुबह उठी मिट्टी सोने का ताज पहन इठलाती है दो राह समय के रथ सिहासन खाली करो कि जनता आती है जानता हूं वही जाने की रहने वाली रहने वाली   

कभी कहते हैं कि सदियों की गुलामी के बाद भारत में लोकतंत्र की स्थापना की गई और जनता सोने का ताज पहन कर खुश है लोकतंत्र और राजतंत्र दोनों में लोकतंत्र आ रहा है अतः सिंहासन खाली करो जनता से आने वाली है वही जनता जाड़े में मेहनत करके अंग्रेजों ने भारतीयों की सांप की तरह होता है फिर भी अब जनता मुंह खोलकर अपना दर्द नहीं करता अरे जनता आ रहा है सिहासन खाली करो  

2.  जनता खान लंबी बड़ी जिनकी वही कसम जनता सचमुच बड़ी बेदना सकती है और ठीक-ठाक मगर आखिर इस पर जन्नत क्या है गुड जनता इस पर क्या कहते हैं माना जनता हो फूल जिसे एहसास नहीं जब चाहो तभी उतार सजा लो दोनों में अथवा कोई दूध में जैसे बाल आने के जंतर मंतर सीमित हो सर खिलौने में ?  

 कभी कहते हैं बहुत ही लंबा और चुपचाप शक करती है कि मत का सही अर्थ क्या है इस रहस्य समस्त जनता क्या कहती है फूल है जिससे कुछ एहसास नहीं होती है कभी अपने निकलो और अब चलो रख दो जनता दूध में ही बच्चा नहीं है जिसे बनाया जा सकता है यंत्र मंत्र खिलौने भी बराबर नहीं किया जा सकता है 

3. लेकिन होता है ढूंढो बवंडर उठते हैं जनता जा कौन कौन हो भूमि कीचड़ आती है दो राह समय के रथ का दर्द भरा नाथ सुनो सिंहासन खाली करो जनता आती है बोकारो से महलों की जाती है सांसों के बाद से ताज हवा में उड़ जाता है जनता की रोक रात मैंने कब कहा वह चाहती है कल उधर हो जाती है ?  

 कवि  कहते हैं कि जानता हूं कार भर्ती है तस्वीर तेरी कॉपी लगती है बवंडर उठ जाते हैं जनता के पुकार के सामने सर नमस्ते खो जाते हैं सुन लो जनता रथ पर सवार होकर आगे सिहासन छोड़ दो जनता आ रही है जनता के ऊपर से बड़े-बड़े मर जाते हैं बड़ों को छोटा होना पड़ता है जनता के साथ सो के उठ जाते हैं जय हो जाती है    

4. हूकार से महलों की निखर जाती है सांसों के बल से ताज हवा में उड़ जाता है जनता की रोक रास्ते में नेताओं का हवा जिधर चाहती है कल उधर ही मुड़ जाती है  ? 

 जनतंत्र का जन्म शीर्षक कविता से ली गई है जिसके रचयिता राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर नहीं है इस पंक्ति का माध्यम से कवि ने जनता के बल का महत्व तथा जनता के राजा को मालूम पड़ जाती है जनता के राज करता जुड़ जाता है जनता की राम को भी रोक नहीं सकता है जनता जल जाती है उसी रोज आती है और जाती है हो जाती है    

5. सर्दियों की ठंडी बुझी राख शुभ गांव की मिट्टी सोने का ताज महल  इठलाती है ? 

जनतंत्र का जन्म तिथि कविता से लिया गया है जिसकी कली राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर जी है सदियों के बाद स्वाधीनता हुआ स्वतंत्र हुआ स्वतंत्रता पाचन तंत्र की स्थापना के लिए भारतीयों की लोग प्रसंग है मनुष्य की ठंडी बुझी राख से अपना शुभ होती है तथा मिट्टी भी सोने का ताज पहन रही है इस पंक्ति से हमें बहुत प्रसन्न प्रसन्न किया गया और प्रभारी सुधीर जी का राष्ट्र कवि बहुत भावुक है 

6. कभी की दृष्टि में आज के देवता कौन है और वह कहां मिलेंगे ? 

   काबिल की दृष्टि में आज का देवता जाता है जो सड़क और मीठी तोड़ते या खेत या पहाड़ियों या रास्ते होते हुए या खेतों में काम करती मिलेंगे इसी को भारत माता द्वारा इनको भगवान माना जाता है और हम लोग मानते हैं इसी को देवता भी कहा जाता है जो हम लोग को खेत खलिहान फसल उगा कर लोगों को मन को भाव को पेट को पालन-पोषण करवाता है और को भगवान मानते हैं कभी किसी से आज का देवता किसान भाई लोग भी हैं 

जनन   बिहार बोर्ड क्लास 10th का बायोलॉजी का क्वेश्चन लॉन्ग और शार्ट

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