हिरोशिमा  सच्चिदानंद हीरानंद वास्तयान   
10th Exam

बिहार बोर्ड क्लास 10th हिंदी लोंग फॉर शॉर्ट आंसर हिरोशिमा  सच्चिदानंद हीरानंद वास्तयान   

हिरोशिमा  सच्चिदानंद हीरानंद वास्तयान   

1. एक दिन साथ साथ सूरज निकला रचित ईश्वर नहीं नगर के चौक पर धूप बत्ती पर अंतरिक्ष से नई भर्ती नीति से छाया मानव जन्म की दिशाहीन सब और पढ़ें व सूरज नहीं हुआ था पूरा में प्रशासन बीचो-बीच नगर के पहिए की जय हो और टूट कर बिखर गए हो दसो दिशा में ? 

 यह पंक्ति हिरोशिमा से लिया गया है इस पंक्ति में कवि का यही कहना है कि अचानक एक दिन प्रचंड ज्वाला से प्रज्वलित धरती को पूर्णता हुआ और विक्रांत सूरज निकला यह धूप अंतरिक्ष क्या स्थान से नहीं निकल कर धरती के छाती को पूर्ण कर निकली को विनाश करने वाली एक प्रकाश चारों ओर पड़ा वह पूरा में उगने वाला नहीं था नहीं होने वाला नहीं था बल्कि चारों ओर से शुरू हुआ था ऐसा लगता है कि वहां के टूट कर बिखर गए जिसको पीछे बीच हिरोशिमा केंद्र नगर था 

2. कुछ जानकार ऑफ द अर्थ केवल एक प्रज्वलन की दूसरी लेने वाले दोपहरी छाया मोना जन की नई नीति लंबे हो हो हो गए लिखी है झोपड़ी सड़कों पर पत्थर पर लिखी हुई छाया मानव की साखी ? 

 कभी कहते हैं कि मानव का राजा हुआ सूरज कुछ क्षण के लिए उदय और अस्त हो गया इसी तरह को दोपहर नहीं पाता करण का निर्माण हुआ जिसमें धूप का परीक्षण ही थी जिसमें धूप का ही था जो अभी भी नहीं है चारों तरफ मानव हाफ होकर जल गए हिरोशिमा में अभी भी अंकित है पत्थर झुलस गए सर क्यों उजड़ गई मानव द्वारा बनाया हुआ हुआ सूरज मानव को बनाकर सूख गए पत्थर की जीत  पत्थर पर दिया हुआ चीन हवा बनकर खड़ा है  

5. छाया दिशाहीन साहब और क्यों पड़ती है स्पष्ट करें ? 

 सूरज के उगने से जो  रति भीम प्रतिबिंब  या छाया का निर्माण होता है वे सभी निश्चित दिशा में है लेकिन बम विस्फोट से निकले हुए प्रकाश से जो छाया बनती है वह दिशाहीन होती है क्योंकि आणविक शक्ति से निकाल ले हुए प्रकाश दिशा में पड़ता है उसका कोई निश्चित दिशा नहीं है बम के मरने वाले की छूट गई देखने को मिला था  

5. मनुष्य की छाया कहां और क्यों पड़ती है? 

मनुष्य की छाया हिरोशिमा क्षेत्र में पढ़ाई है और पढ़ती थी अर्थात मानव की छाया प्रति चीन अभी भी देखा जा सकता है कि मानव तो भाप बनकर उड़ गए लेकिन उनकी मौजूद वहां पड़ी है 

6.  हिरोशिमा में मनुष्य की साखी के रूप में क्या है? 

 हिरोशिमा में परमाणु बम गिराया गया था सब कुछ भाव बनकर उड़ा ले गया था मनुष्य उड़े गए चारों ओर बर्बादी ही बर्बादी हुई हिरोशिमा उस नरसंहार की छाया अभी भी हिरोशिमा में देखा जा सकता है और लोग देखने गए हैं जो मनुष्य की परछाई नजर आती है जो भाग बन कर सो गई सड़कों पर बिखर गई हवा में बिखर गई सांसों में बस गई हर जगह को देश के नाम से लोग जानने लगे तो समस्या है यहां दुश्मन 

जनन   बिहार बोर्ड क्लास 10th का बायोलॉजी का क्वेश्चन लॉन्ग और शार्ट

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